सकारात्मक नीति और सौर उर्जा ही विकास की कुंजी

क्या कभी आपने सोचा है कि जो हम बार-बार विकास औऱ तकनीक की बात करते हैं, उसकी गति में रह रहकर ब्रेक क्यों लग जाता है? इसका एक मात्र कारण है विकास के लिए बुनियादी जरूरत में कमी का होना। और वो बुनियादी जरूरत है बिजली। कोई देश कैसे वैश्विक ताक़त बनने के ख़्वाब देख…

Use of Mobile Phones for Social & behaviour Change

The consultation paper (draft) presents the key areas of emphasis in the growing mobile for development space in India. The purpose is to understand the scope and magnitude of the expanding mobile domain as it is lately linked essentially to advance development and governance objectives and seen as the most democratic technology medium to offer scope to…

बदलते समाज में मोबाइल का बदलता चेहरा

भारत में जब मोबाइल नया-नया आया था, तब हर मोबाइल रखने वाला इंसान किसी महामानव से कम नहीं समझा जाता था। वह भी एक अलग ही जमाना था, जब लोग रोमिंग में जाते ही अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर देते थे, क्योंकि बिल बहुत ज्यादा आता था। लेकिन, पिछले दस-पंद्रह सालों में बैंकों में काम-काज…

CIRC-Ratnauli and Mansoorpur

Community Information Resource Centre (CIRC) – Ratnauli & Mansoorpur: A Report Thanks to ‘Community Information Resource Centre’ -(CIRC)’s gutsy initiative, the villagers of Ratnauli and Mansoorpur now get the internet connectivity where there is rarely electricity supply, just the odd TV set and no roads to speak of. Moreover, there the people are barely literate,…

ईट से इंटरनेट युग तक के सफर से ही बदलेगी तस्वीर!

पिछले दिनों 1 मई को हर बार की तरह, इस बार भी देश भर में मजदूर ये नारे लगाते दिखाई दिए कि दुनिया के मजदूरों एक हो जाओ। ये देखकर अपने आप में एक सवाल पैदा होता है कि क्या वाकई ये मजदूर कभी एक हो पाएंगे? क्या वाकई इन्हें कभी अपना हक मिल पाएगा?…

सूचना संपन्न समृद्ध गांवों से ही देश का विकास संभव

आजकल साधनों, सुविधाओं और संसाधनों की कोई कमी नहीं है। धन की भी कोई बहुत बड़ी समस्या अब नहीं रही। सरकार की कई ऐसी योजनाएं हैं जो आदमी के पैदा होने से लेकर मौत के बाद तक सामाजिक सरोकारों को पूरा करने के लिए काफी हैं। पूरा माहौल लाभकारी माहौल से भरा हुआ है। योजनाओं,…

गांवों की दहलीज पर डिजिटल मीडिया की दस्तक

13 मार्च 2013, यानि रेड रिक्शा रेवलूशन यात्रा के पांचवे दिन जब मुझसे 23 साल की राखी पालीवाल का परिचय एक उप-सरपंच के तौर पर कराया गया तो मैं हैरान रह गया। जींस औऱ कुर्ते में मोटरसाइकिल की सवारी करते देख राखी को पहली नजर में कोई भी शहरी लड़की समझने की भूल कर बैठेगा।…

‘अब ‘की-बोर्ड’ पर थिरकती हैं, नोरती बाई की उंगलियां’

करीब 20 साल पहले भारत में कंप्यूटर युग का सपना देखा गया था। यह सपना कुछ हद तक तो पूरा जरूर हुआ है, लेकिन देश के हर नागरिक के लिए यह सपना पूरा होने में अभी कुछ और वक्त लगेगा। जहां देश की शहरी आबादी का बड़ा हिस्सा कंप्यूटर का इस्तेमाल कर रहा है, वहीं…