To make learning more engaging with Google Assistant

Google Assistant is an artificial intelligence–powered virtual assistant developed by Google that is primarily available on mobile and smart home device. Google Assistant can engage in two-way conversations. DEF has partnered with Google and have Selected Assistant Community Leads (ACLs) to drive digital literacy initiative with access to information with Google Assistant. “Assistant Community Leads…

Smartpur centers celebrate World Menstrual Hygiene Day

On the occasion of World Menstrual Hygiene Day, Smartpur teams across 100 locations in India ensured awareness, tackled myths and taboos surrounding menstruation through discussions and activities both online and offline. The team of Kurumalai, TamilNadu, showed solidarity by wearing bracelet made up of beads. They further discussed about the importance of Menstrual Hygiene Day along with the…

DEF extends relief to over 100,000 households

India has been under lockdown since March 24, 2020, to break the spread of Covid-19 infection. While it is the only solution to avoid community spread, many like migrant workers, marginalised communities and poorest of the poor are adversely affected due to the lack of information, livelihood and connectivity. Digital Empowerment Foundation (DEF) launched the…

कोविड-19 के लॉकडाउन के कारण दिल्ली के प्रवासी कामगारों को न तो नौकरी है और न ही सामाजिक सुरक्षा; विशेषज्ञ कानूनी संरक्षण और राजनीतिक उदासीनता को ज़िम्मेदार मानते हैं.

“बीमारी से लड़ें कि भूखमरी से. अच्छा किसको लगता है जान जोखिम में डाल कर खाना लेना. घर भी जाना चाहे तो उसके लिए भी पैसे नहीं हैं.”

कोविड-19 के लॉकडाउन के कारण दिल्ली के प्रवासी कामगारों को न तो नौकरी है और न ही सामाजिक सुरक्षा; विशेषज्ञ कानूनी संरक्षण और राजनीतिक उदासीनता को ज़िम्मेदार मानते हैं.

बिहार के आरा जिले के ललन यादव दिल्ली के वज़ीरपुर में मछली मोहल्ले में रहते हैं. ललन को कोरोना से अधिक रोज़गार की चिंता सता रही है. वह कहते हैं, “हमलोग मज़दूर आदमी कमायेंगे नहीं तो परिवार खायेगा क्या. मैं अपने घर में अकेला कमाने वाला हूँ. मार्च से काम नहीं मिला है.

कोरोना महामारी के समय दिल्ली के पंजीकृत निर्माण मजदूरों को नहीं मिल पा रहा सरकारी योजनाओं का लाभ

दिल्ली के इंदिरा विकास कॉलोनी में रहने वाले 32 वर्षीय प्रमोद दास लॉकडाउन की बढ़ती अवधि से चिंतित हैं। प्रमोद निर्माण के क्षेत्र में दिहाड़ी-मज़दूरी करते हैं। वह कहते हैं, “पहले तो प्रदूषण के कारण काम बंद रहा। अब कोरोना वायरस के कारण काम मिलना बंद हो गया है। हम लोग दिहाड़ी-मज़दूरी करते हैं, काम नहीं मिलेगा तो कहां से खाएंगे?”

सरकारी गोदाम में सड़ रहा अनाज: राशन कार्ड नहीं होने के कारण भूखे सोने पर मज़बूर है करोड़ों परिवार

बिहार के पश्चिमी चंपारण के पचकहर गांव की 35 वर्षीय मनीषा देवी को राशन कार्ड में संशोधन के लिए आवेदन दिए हुए इस महीने की 27 तारीख को पूरे दो वर्ष हो जायेंगे, उन्हें अपने राशन कार्ड का अब तक इंतज़ार है. मनीषा कहती हैं, “राशन कार्ड के लिए चक्कर लगा-लगा कर थक गयी, अब तक राशन कार्ड बन कर नहीं आया”. मनीषा के पति देहाड़ी-मज़दूरी का काम करते हैं. 3 बच्चों कि माँ मनीषा आगे कहती हैं, “लॉकडाउन से पहले हम भी खेतों में कुछ काम कर लेते थे, मेरे पति को भी गांव में काम मिल जाता था, जिस से परिवार किसी तरह चल रहा था. अब तो उधार लेकर किसी तरह खाने का इंतेज़ाम कर रहे हैं, लेकिन ऐसा कब तक चलेगा कुछ समझ नहीं आ रहा है.”

समाज में बढ़ती हिंसा, सोशल मीडिया और दुष्प्रचार: क़ानूनी प्रतिक्रिया और समस्या (भाग पांच)

लिंचिंग जैसी घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रहीं हैं. आये दिन कहीं न कहीं भीड़ किसी को भी पकड़ कर हत्या कर दे रही है. 16 अप्रैल, 2020 को भीड़ ने महाराष्ट्र के पालघर में 2 साधु समेत उनके ड्राइवर की पीट-पीट कर हत्या कर दी. शुरुआती ख़बरों के अनुसार इलाके में बच्चा चोरी की अफ़वाह गर्म थी. नासिक की तरफ से आ रहे है कार सवार लोगों को रोक कर हमला कर दिया. हालांकि मौके पर 20 पुलिस कर्मी भी पहुँच गयी थी. लेकिन लगभग 200 लोगों की भीड़ पुलिस पर भी हमला कर दिया. 20 पुलिस कर्मियों की टीम में 3 पुलिस कर्मी भी घायल हो गए. इस घटना के संबंध में अब तक 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है.

समाज में बढ़ती हिंसा, सोशल मीडिया और दुष्प्रचार: क़ानूनी प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (चौथा भाग)

“मर्ज़ कहीं और है दवा कहीं और ढूंढ रही है सरकार,” यह बात रिहाई मंच के सचिव राजीव यादव ने आईटी एक्ट, 2000 में इंटरमेडियरी के दिशा-निर्देशों में सरकार के द्वारा किये जा रहे रहे बदलाव के संदर्भ में कही. राजीव आगे कहते हैं, “लिंचिंग के लिए फेक न्यूज़ और सोशल मीडिया से कहीं अधिक ज़िम्मेदार राजनीतिक वातावरण है. जिस तरह से लिंचिंग करने वालों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त उसे सोशल मीडिया के दिशा-निर्देशों को बदल कर नहीं रोका जा सकता.”